लगातार 21 मेडेन ओवर डालने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं बापू नाडकर्णी, कोई नहीं तोड़ पाया इनका रिकॉर्ड

Quaint Media
New Delhi: भारत के स्पिनरों ने यूं तो क्रिकेट की दुनिया में एक से बढ़कर एक रिकॉर्ड बनाए हैं, लेकिन टीम इंडिया के एक स्पिनर ऐसे भी रहे हैं, जिनका रिकॉर्ड 54 साल बाद भी दुनिया का कोई भी गेंदबाज छू तक नहीं पाया है। आज हम उसी महान खिलाड़ी का जन्मदिन एक लेख के माध्यम से मना रहे हैं।

टेस्ट क्रिकेट में लगातार 21 ओवर इस भारतीय गेंदबाज ने मेडन फेंके थे। ये ऐसा रिकॉर्ड है जो आज तक टूट नहीं पाया है। हम बात कर रहे हैं लेफ्ट आर्म स्पिनर आरजी बापू नाडकर्णी (RG Bapu Nadkarni) की। हरफनमौला की तरह टीम इंडिया में शामिल हुए इस गेंदबाज की लाइन लेंथ इतनी सटीक होती थी कि उनकी गेंदों को हिट करना किसी भी गेंदबाज के लिए चुनौती होती थी।

4 अप्रैल 1933 को महाराष्‍ट्र के नासिक में जन्‍मे बापू नाडकर्णी का पूरा नाम रमेशचंद्र गंगाराम नाडकर्णी था। उन्होंने भारत की ओर से 41 टेस्‍ट मैच खेले। लेकिन उनके सामने रन बनाना हमेशा बल्लेबाजों के लिए चुनौती ही रही। वह कितने कठिन गेंदबाज थे, इसका उदाहरण उन्होंने 12 जनवरी 1964 को मद्रास (अब चेन्नई) में एक टेस्ट मैच के दौरान दिया।

ये टेस्ट मैच इंग्लैंड के विरुद्ध खेला गया। इस मैच में बापू ने लगातार 21 ओवर मेडन फेंके। उन्होंने इस मैच में 21.5 ओवर (131 गेंदें) मेडन फेंके। ये आज तक एक रिकॉर्ड है। इंग्‍लैंड की पहली पारी के दौरान उन्होंने 32 ओवर गेंदबाजी की थी। इन 32 में से 27 ओवर मेडन थे। इस दौरान उन्होंने सिर्फ पांच रन दिए। यह मैच 10 से 15 जनवरी (एक रेस्‍ट डे मिलाकर) तक 1964 को खेला गया था।

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दूसरे सबसे किफायती गेंदबाज

बापू नाडकर्णी को दुनिया का सबसे कंजूस गेंदबाज यूं हीं नहीं कहा जाता। वह ऐसे गेंदबाज रहे, जिनकी गेंदों पर रन बनाना किसी के लिए भी आसान नहीं रहा। उनके आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। उनकी इकोनोमी रेट दुनिया में दूसरी सबसे कम है। दुनिया 50 या ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में वह दूसरे गेंदबाज हैं, जिनकी इकोनॉमी रेट 1.67 है। उनसे आगे दक्षिण अफ्रीका के टीएल गोडार्ड हैं। उन्होंने भी 41 टेस्ट मैचों में 123 विकेट लिए। उनकी इकोनॉमी रेट 1।64 की है।

बापू ने 41 टेस्‍ट मैचों के करियर में 25.70 के औसत से 1414 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 1 शतक और 7 अर्धशतक ठोके। गेंदबाजी में उन्‍होंने 29.07 के औसत से 88 विकेट हासिल किए। एक पारी में 5 या इससे अधिक विकेट चार बार लिए। नाडकर्णी ने पहला टेस्‍ट दिसंबर 1955 में न्‍यूजीलैंड के खिलाफ दिल्‍ली में खेला था। इसी टीम के खिलाफ वर्ष 1968 में उन्‍होंने अपना आखिरी टेस्‍ट खेला।

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