आज ही के दिन टीम इंडिया ने विंडीज के खिलाफ रचा था इतिहास, जीता था पहला टेस्ट मैच

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New Delhi: ’10 मार्च’, ये तारीख भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Test Team) के लिए ऐतिहासिक दिन है। ICC टेस्ट रैंकिंग में टीम इंडिया पहले पायदान पर है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब भारतीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ एक टेस्ट जीत के लिए तरसती थी, और लगातार 23 बार नाकाम (11 ड्रॉ +12 हार) होने के बाद 24वें मैच को आज ही दिन भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहला टेस्ट मैच और सीरीज अपने नाम की थी।

दरअसल, बात 1971 की है। उस वक्त अजित वाडेकर की टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर थी और यह उसका तीसरा दौरा था। भारतीय टीम (Indian Cricket Test Team) ने पहला दौरान 1952-53 में किया था और उसे पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ में 1-0 से हार मिली थी। जबकि 1961-62 के दौरे में तो भारतीय टीम की बहुत बुरी गत बनी थी और उसे क्लीन स्वीप झेलना पड़ा था। लेकिन ऐसा कतई नहीं है कि भारत का सिर्फ विंडीज दौरे पर टेस्ट क्रिकेट में खराब प्रदर्शन जारी था, बल्कि 1948-49 ,1958-59 और 1966-67 में वह अपनी जमीं पर ही कैरेबियाई टीम से क्रमश: 1-0 , 3-0 और 2-0 से पिटी थी। पहली दो सीरीज़ 5-5 मैचों की थीं जबकि 1966-67 में तीन मैच हुए थे।

खैर, 1971 में एक बार फिर भारतीय टीम एक मुश्किल दौरे के लिए कैरेबियाई जमीं पर उतरी। 18 से 23 फरवरी 1971 के बीच किंग्सटन में खेला गया पहला टेस्ट ड्रा रहा जो कि भारत के लिहाज से बहुत अच्छी बात थी। इस दौरे पर भारतीय टीम की अगुवाई अजित वाडेकर कर रहे थे तो कैरेबियाई टीम की कमान गैरी सोबर्स के हाथों में थी। इस टेस्ट में दिलीप सरदेसाई के 212 रन के दम पर टीम ने एकमात्र पारी में 387 रन बनाए। जबकि विरोधी टीम ने पहली पारी में 217 तो दूसरी पारी में 385/5 फॉलोआन का स्कोर किया था।

10 मार्च बनी ऐहितासिक तारीख

पहले टेस्ट में दिलीप सरदेसाई और एकनाथ सोल्कर के दम पर भारतीय टीम ने अच्छा ख़ासा स्कोर खड़ा करके एक बात साबित कर दी थी कि इस बार वह अपने विरोधी से हर हाल में टक्कर लेने के लिए मैदान में उतरी है। आखिरकार 10 मार्च 1971 को वो दिन भी आया जिसका 1948-49 से ना सिर्फ भारतीय क्रिकेटरों बल्कि भारतीय क्रिकेटप्रेमियों को बेसब्री से इंतजार था। जी हां, पोर्ट आॅफ स्पेन के मैदान में 6 मार्च से दूसरा टेस्ट शुरू हुआ जिसमें टॉस जीतकर विंडीज ने पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया। ईरापल्ली प्रसन्ना (4/54 ) , बिशन सिंह बेदी (3/46), आबिद अली (2/540 और एस वेंकटराघवन (1/35) के आगे कैरेबियाई टीम 214 रन पर ढेर हो गई।

भारतीय पारी का आगाज़ अनुभवी वीनू मांकड़ और अपना पहला मैच खेले रहे सुनील गावस्कर ने किया और पहले विकेट की साझेदारी में 68 रन जोड़कर एक अच्छी शुरूआत दी। अंतत: भारतीय टीम 352 रन बनाकर आउट हुई जिसमें दिलीप सरदेसाई ने 112, गावस्कर ने 65 और सोल्कर ने 55 रन का सहयोग दिया। यानि भारतीय टीम को मिली 138 रन की महत्वपूर्ण बढ़त। जबकि विंडीज के लिए आॅफ स्पिनर जैक ​नोरेबिया ने 9/95 का दमदार प्रदर्शन किया था। दूसरी पारी में कैरेबियाई टीम ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन वह इस बार 261 पर ढेर हो गई। इस बार एस वेंकटराघवन ने 5 तो सुलीम दुर्रानी और बेदी ने 2-2 विकेट अपने नाम किए।

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24वें प्रयास में मिली जीत

बेशक भारतीय टीम को मैच जीतने के लिए 124 रन का लक्ष्य मिला था, लेकिन जीत का भरोसा किसी को नहीं था। एक बार फिर ​अच्छी शुरूआती देने की जिम्मेदारी अनुभव और युवा जोश पर थी यानि मांकड़ और गावस्कर पर। दोनों ने पहले विकेट की साझेदारी में 74 रन जोड़कर​ विरोधी के खिलाफ पहली टेस्ट जीत की नींव तैयार कर दी थी। मांकड़ 29 रन पर आउट हुए, लेकिन थोड़े ही अंतराल में सलीम दुर्रानी बिना खाता खोले तो पहली पारी के शतकवीर सरदेसाई 3 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। पर मानना होगा कि अनुभवी बल्लेबाज़ आबिद अली नाबाद 21 ने युवा खिलाड़ी गावस्कर के साथ मिलकर भारतीय टीम को विंडीज के खिलाफ पहली टेस्ट जीत दिलाई।

गावस्कर ने 67 रन की नाबाद पारी खेली। यकीनन इस जीत ने ना सिर्फ भारतीय क्रिकेट टीम की विश्व क्रिकेट में अहमियत बढ़ाई बल्कि युवा गावस्कर के रूप में दुनिया को एक ऐसा सितारा मिला जो आज भी हर किसी के दिल में बसता है। 24वें प्रयास यानि 24वें टेस्ट में भारतीय टीम को विंडीज के खिलाफ जीत मिली और मैच के हीरो थे युवा सुनील गावस्कर। वैसे गावस्कर के लिए आबिद अली को ओपनिंग से हटाकर मिडिल आॅर्डर में खिला​ने के लिए अजित वाडेकर की भी तारीफ करनी होगी।

मिली पहली टेस्ट सीरीज़ जीत

पोर्ट आॅफ स्पेन के बाद अगले तीन टेस्ट क्रमश: जॉर्जटाउन, ब्रिजटाउन और पोर्ट आॅफ स्पने ड्रा रहे। यानि टीम इंडिया ने पहली बार वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज़ 1-0 के अंतर से जीती। वैसे यह भारतीय क्रिकेट टीम की तब विदेशी धरती पर चौथी जीत थी। भारतीय टीम को विदेशी जमीं पर पहली तीन जीतें न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली थीं और यह संभव हुआ था मंसूर अली खान पटौदी कप्तानी में। इन तीन जीत में से दो में अजित वाडेकर तो एक बार रूसी सूर्ती हीरो रहे थे।

दौरे के हीरो रहे थे गावस्कर

इस दौरे पर सुनील गावस्कर ने 4 मैचों की 8 पारियों में बल्लेबाज़ी करते हुए 154.80 के औसत 774 रन बनाए थे जिसमें 220 के सर्वोच्च स्कोर समेत 4 शतक शामिल थे। यह आज भी एक रिकॉर्ड है।

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