तेंदुलकर के साथ किया था डेब्यू, 5 मैच के बाद लगा ब्रेक, फिर बनें शानदार कमेंटेटर और कोच

New Delhi: दिल्ली में जन्में इंडियन क्रिकेटर विवेक राज़दान तमाम उतार-चढ़ाव का सफर तय करते हुए 25 अगस्त शनिवार को अपनी जिंदगी का 49वां सालगिरह मना रहे हैं। क्रिकेट के महानायक कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के साथ 20 साल की उम्र में राज़दान ने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत जैसे ही की थी कि अचानक उस पर ब्रेक लग गई। अब इसे बदक़िस्मती कहें या फिर समय का खेल कि यहीं से उनकी ज़िंदगी में क्रिकेट से ही जुड़ा यू-टर्न आया और वह क्रिकेटर से शानदार हिंदी कमेंटेटर और कोच बन गए।

महज 5 मैच खेलने के बाद ही क्रिकेट से संन्यास लेने वाले राज़दान ने दिल्ली में यंगस्टर्स को क्रिकेट की ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी और साथ ही हिंदी कमेंट्री भी करने लगे, अपनी बेहतरीन शैली की बदौलत वह बहुत जल्द ही लोगों के दिलों पर एक उम्दा हिंदी कमेंटेटर के रूप में राज करने लगे। राज़दान ने शानदार क्रिकेटर्स कहे जाने वाले जैसे राहुल सांघवी, मनिन्द्र सिंह, अजय जडेजा, गगन खोड़ा, गुरुशरण सिंह आदि के साथ देश का उच्च-स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है। इन सभी बेहतरीन खिलाड़ियों को एक साथ रखने के कई कारण हैं, लेकिन उनमें जो सबसे ख़ास है वह यह कि इन सभी ने दिल्ली के उसी नेशनल स्टेडियम में अपनी शुरुआती ट्रेनिंग ली जिसमें विवेक राज़दान ने ली थी।

अपने क्रिकेट करियर में उन्होंने सिर्फ कुछ गिने-चुने मैच ही खेले फिर भी बड़ी लोकप्रियता कमाई। राज़दान ने अपने करियर का पहला मैच दुनिया के महानतम खिलाड़ियों में गिने जाने वाले सचिन तेंदुलकर के साथ 1989 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट-सीरीज के रूप में खेला था। आपको यह भी बता दें कि राज़दान, तेंदुलकर और एक अन्य क्रिकेटर साहिल अंकोला ने एक साथ पाकिस्तान के खिलाफ ही अपने करियर का पहला एक दिवसीय मैच खेला था।

एक क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद दिल्ली के एक क्रिकेट प्रशिक्षण केंद्र में उन्होंने कोच के रूप में यंगस्टर्स को क्रिकेट की ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी और साथ ही हिंदी कमेंट्री भी करने लगे। 1989-1990 के बीच राज़दान ने तीन एक-दिवसीय और दो टेस्ट मैच खेले जो उनके क्रिकेट करियर में खेले गए कुल मैच बन गए। तीन वन-डे मैच में उन्होंने एक विकेट लिया और पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच की सीरीज में पांच विकेट लिया था, बता दें कि विवेक राज़दान क्रिकेट में राइट-हैंड फास्ट बॉलर थे। खेल छोड़ने के बाद उन्हें कमेंट्री करना बहुत पसंद आया जिसके बाद वो एक सफल हिंदी कमेंटेटर बन गए।

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