जब वेस्टइंडीज ने दिया था सचिन को कभी न भूलने वाला दर्द, खुद को 2 दिन तक रखा था कमरे में बंद

New Delhi: दुनिया के सबसे बेहतरीन क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने बल्लेबाज के रूप में जो रिकॉर्ड कायम किए शायद ही उसे कोई तोड़ पाए। सचिन ने अपने करियर में ढेरों रिकार्ड बनाये और कई उपलब्धियां हासिल की लेकिन एक चीज वे चाहकर भी हासिल नहीं कर पाए।

यह चीज कुछ और नहीं बल्‍कि कप्‍तान के रूप में भी भारत के लिए अच्‍छा करने का सपना था। तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) ने सबसे ज्यादा 200 टेस्ट मैच खेलने के रिकॉर्ड के साथ-साथ टेस्ट में सबसे ज्यादा 15,921 रन बनाने का रिकॉर्ड भी बनाया है। सिर्फ टेस्ट नहीं वनडे मैचों में भी सचिन ने सबसे ज्यादा 18,426 रन बनाए, सबसे ज्यादा 49 शतक और 96 अर्द्धशतक भी उन्हीं के नाम हैं। हालांकि कप्‍तान के रूप में उनका रिकॉर्ड शानदार नहीं रहा है।

भारत के बैटिंग लीजेंड सचिन तेंदुलकर को 31 मार्च को ही वेस्टइंडीज से ऐसा दर्द मिला था जिसके चलते उन्होंने क्रिकेट से सन्यास लेने तक का मन बना लिया था। दरअसल 31 मार्च 1997 को टीम इंडिया सचिन की कप्तानी में वेस्टइंडीज दौरे पर गई थी। इस दौरे पर बारबाडोस टेस्ट मैंच में वेस्टइंडीज ने जीत के लिए भारत को महज 120 रन का लक्ष्य दिया था। लेकिन भारतीय बल्लेबाज इसे पाने में असफल रहे और 81 रन पर ऑलआउट हो गए। यह हार सचिन के लिए इतनी दुखदायक रही कि क्रिकेट इस भगवान ने क्रिकेट से सन्यास लेने का मन बना लिया था।

इसे लेकर सचिन ने अपनी आत्मकथा ‘प्लेइंग इट माय वे’ में लिखा है कि टीम के लगातार खराब प्रदर्शन के लिए एक कप्तान के रूप में मैं खुद को जिम्मेदार मानता था। सचिन ने किताब में खुलासा किया कि हार के बाद मैंने खुद को दो दिन तक होटल के कमरे में बंद कर लिया था।

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इतना नजदीकी मुकाबले हारने से मैं हताश था और मैं नहीं जानता था कि इससे बाहर कैसे आऊं। इस सब से उबरने में मुझे लंबा समय लगा और इस दौरन में खेल से दूर होने पर विचार करने लगा था।

तेंदुलकर को अपने 24 साल के चमकदार कैरियर के दौरान दो बार भारतीय टीम की कप्तानी सौंपी गयी लेकिन वह इसमें खास सफल नहीं रहे। सचिन पहली बार 1996 में कप्तान बने लेकिन टीम के खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें 1997 में इस पद से हटा दिया गया।

हालांकि सचिन की ही कप्‍तानी में भारत ने साउथ अफ्रीका और ऑस्‍ट्रेलिया को हराते हुए टाइटन कप जीता था। सचिन की कप्तानी में भारत ने 73 मैच खेलते हुए सिर्फ 23 मैच जीत हासिल की जबकि 43 मैचों में हार हुई थी, एक मैच टाई हुआ था और छह मैचों में कोई नतीजा नहीं आया था। इस तरह सचिन की कप्तानी में भारत की जीत का प्रतिशत 35.07 है जो बहुत कम है।

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